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maa baap saymore

माँ-बाप

माँ-बाप सोच रहा था वो गाडी, बंगला, पैसा कमाकर माँ-बाप को खुश कर देगा, अरे पगले, तेरी एक मुस्कान पे वो मरते है, उसे अब कौन समझाएगा.  
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humanity saymore

इंसानियत बचाओ

इंसानियत बचाओ :- जात धर्म के नाम पे बाँट रहे हे वो, काट रहे हो तुम, काट रहे हो तुम, कट इंसान रहा है लेकिन मर इंसानियत रही है. बचाओ इंसानियत को वरना पीढ़िया ख़राब हो जाएगी, इंसान तो नज़र ...
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किनारा और लेहरे

किनारा और लेहरे :– बताना नहीं पड़ता लेहरोंको की वो किनारे से प्यार करती है, अक्सर ख़ामोशी से छूकर किनारे को वो वापस चली जाती है| किनारा समझ नहीं पाता उन लेहरोंके प्यार को, या समझ के भी अपना नहीं पाता, ...
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दर्द और मुस्कान 

दर्द और मुस्कान  :- दर्द है, आँसू है, छिपाना पड़ता है इनको इसलिए चेहरे पे मुस्कान भी है | मुस्कान को भी तकलीफ है की कही वो झूठी साबित ना हो जाए और, तकलीफ को भी तकलीफ है की कही ...
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धरती के टुकड़े

धरती के टुकड़े  :- रखा जिसने नौ महीने तुझे उसके पेट मे, उस माँ के आँसू दिख गए, रो रही है ये धरती, क्या वो तेरी माँ नहीं ? बाँट दिया उसे, कर दिए उसके टुकड़े जिसे तू अपनी माँ ...
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the comedian

Shayari dedicated to the comedian

Following is my dedication to “the comedian” specially to Kapil Sharma Sir  with a shayari :- गम क्या है उनसे अच्छा कौन जानता है, हँसाना सबको तो बस बहाना है, चाहते नहीं की कोई और डूबे वहाँ, जहाँ वो खुद ...