the only word describes me is Complicated
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ना जाने क्यों

ना जाने क्यों ये शहर मुझे पसंद नहीं आ रहा ना जाने क्यों ये शहर मुझे रास नहीं आ रहा ना जाने क्यों यहां की गलिया मुझे मेरी मंजिल तक नहीं पहुंचा रही ना जाने क्यों यहां के रास्ते मुझे ...
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खुद से मिलना

सोचा नहीं था ….. की तुमसे मिलने पे खुद से मिल लुंगी …. तुम्हे समझाते समझाते खुद भी समझ लुंगी …… तुम्हारी तकलीफे सुलजाते सुलजाते खुद को भी सुलजा लुंगी ……. सोचा नहीं था की आज फिर से जी लूँगी ...

बेपनाह

बेपनाह नफरत की इल्तिजा बस बेहद मोहब्बत से मंजिल पाती है

Power of Hatred

नफरत की आग सिर्फ दुश्मन की आखों मे छूपी मोहब्बत ठंडी कर सकती है

नफरत

नफरत की आड में इकरार है तो मोहब्बत मे इन्कार को कैसे नजरअंदाज करे
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मै दूर जा रही थी

मैं दूर जा रही थी वो मेरे पास आ रहा था मैं गुस्सा हो रही थी वो सब सहता जा रहा था मैं चिल्ला रही थी वो मुझे सुनता जा रहा था मैं छोड़ ना चाहती थी वो मुझे पकड़े ...