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ना जाने क्यों

ना जाने क्यों ये शहर मुझे पसंद नहीं आ रहा ना जाने क्यों ये शहर मुझे रास नहीं आ रहा ना जाने क्यों यहां की गलिया मुझे मेरी मंजिल तक नहीं पहुंचा रही ना जाने क्यों यहां के रास्ते मुझे ...
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खुद से मिलना

सोचा नहीं था ….. की तुमसे मिलने पे खुद से मिल लुंगी …. तुम्हे समझाते समझाते खुद भी समझ लुंगी …… तुम्हारी तकलीफे सुलजाते सुलजाते खुद को भी सुलजा लुंगी ……. सोचा नहीं था की आज फिर से जी लूँगी ...
When does Poetry occur to You?

When does Poetry occur to You?

Whenever tears made their way through my eyes, a poem was born; whenever unanswered questions buzzed inside my head, a poem was born; whenever fury burned my heart with passion, a poem was born. My poem, in figurative sense, really rose from ashes. It is the phoenix risen from the tears and fire. Oh yes, it is the phoenix!
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मै दूर जा रही थी

मैं दूर जा रही थी वो मेरे पास आ रहा था मैं गुस्सा हो रही थी वो सब सहता जा रहा था मैं चिल्ला रही थी वो मुझे सुनता जा रहा था मैं छोड़ ना चाहती थी वो मुझे पकड़े ...
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इंसानियत बचाओ

इंसानियत बचाओ :- जात धर्म के नाम पे बाँट रहे हे वो, काट रहे हो तुम, काट रहे हो तुम, कट इंसान रहा है लेकिन मर इंसानियत रही है. बचाओ इंसानियत को वरना पीढ़िया ख़राब हो जाएगी, इंसान तो नज़र ...